महिलाओं को अबला बनाये रखने की साजिश
राजनीति के मैदान में नहीं है संतोषजनक भागीदारी, मौजूदा संसद में मात्र 11 प्रतिशत महिलाए
सौरभ स्वीकृत
देश के लोकतांत्रिक ढांचे की कमजोरी आधी आबादी की उपस्थिति से साफ हो जाती है। भारतीय संसद मे 33 प्रतिशत महिलाओं की सीट आरक्षित करने का मामला सभी दल के नूरा कुश्ती से इस लोकसभा चुनाव में भी नहीं हो पाया है। यही कारण है कि 545 सदस्यीय लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मात्र 61 है, जो सांसदों की संख्या का महज 11 प्रतिशत है। अगर अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) के ताजा आंकड़ों पर गौर किया जाए तो महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में 183 देशों में रवांडा पहले नम्बर पर है। वहां संसद में 48.8 फीसदी महिलाएं हैं। संसद में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने भारत दुनिया में 134वें स्थान पर है। यह एक एक अजीब बात है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र वाला देश माने जाने के बवजूद भारत महिलाओं को प्रतिनिधित्व के मामले में अल्जीरिया जैसे छोटे देशों से भी पीछे है। संयुक्त राष्ट्र के मापदंडों के अनुसार संसद में महिलाओं की भागीदारी का सही पैमाना 30 फीसदी है और सभी राष्ट्रों के लिए इस लक्ष्य को हासिल करने की अपील समय-समय पर की जाती रही है। महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले देशों में अल्जीरिया (31.6 फीसदी), मैक्सिको (निचला सदन 36.8 फीसदी) और तिमोर लेस्ते (38.5 फीसदी) शामिल हैं।
भारत में जब पंचायती राज में भी महिलाओं की प्रतिनिधित्व को लेकर मामला आया तो देश में एमपी और एमएले ने मिलकर इस समस्या का समाधान किया और पंचायत में महिलाओं की संख्या पचास फीसदी तक कर दिया लेकिन लोक सभा और राज्य सभा में यह मामला लटका हुआ है। अभी भी बहुत कम महिलाओं को इसके लिए टिकट दिए जाते हैं। महिलाओं के सीट सुरक्षित हो जाने से पुरूषों का समीकरण बिगड सकता है। और इस पुरूष प्रधान समाज के लोग कभी यह नहीं चाहेंगे कि जिन्हे अब तक इन लोगों ने दबाकर, शोषण कर, घर के चार दिवारी में रखा है, वे अपेक्षित महिलाएं घर से बाहर निकल कर इनका बराबरी करे। क्योकि अगर ये बराबरी में आ जायेगीं तो फिर शोषित वर्ग कौन सा रह जायेगा। भारत में अगर बात करें तो सबसे महिला एमपी उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 13, पश्चिम बंगाल, एमपी से 6 और आंध्र प्रदेश एवं बिहार से 5 महिला सांसद हैं।
ग्यारहवीं लोकसभा में पहली बार विधेयक पेश हुआ था। उस समय उसकी प्रतियां फाड़ी गई थीं। इसके बाद 13वीं लोकसभा में भी तीन बार विधेयक पेश करने का प्रयास हुआ, लेकिन हर बार हंगामे और विरोध के कारण ये पेश नहीं हो सका था। चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा में भी महिला विधेयक की यही हाल रही। 2004 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस ने महिला शसक्तिकरण पर जारे देते हुए महिला विधेयक को अपना चुनावी ऐजेंडा बनाया थ। 2009 में भी कांग्रेस ने इसे अपना चुनावी ऐजेंडे में शामिल किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका। इन चुनावों में बीजेपी एवं अन्य दलों ने भी महिला शसक्तिकरण पर जोर देते हुए महिलाओं को अपने पक्ष में वोट देने के लिए अपील किया था। लेकिन यह बात दिल को झकझोर देती है कि जो दल चुनाव के वक्त अपने वोट बैंक के रूप में महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उनके शसक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करतें है लेकिन जब संसद में महिला विधेयक को पारित करने के इन दलों की सहमती एवं वोट की जरूरत पड़ती है तो ये लोग अपना पैर पीछे खींच लेते हैं। हो हल्ला कर विधेयक को परित नहीं होने देते।
झारखंड की राजनीति में महिलाओं को मौका नहीं
झारखंड राज्य बनने के बाद यहां की महिलाएं घर की मुर्गी दाल बराबर के जैसी है। राज्य के राजनीति में इनका भूमिका न के बराबर रही है। अलग राज्य बनने के बाद अब तक देश में दो बार लोक सभा चुनाव हो चुका है लेकिन अब तक सिर्फ दो महिला जीत कर संसद में गयी है। खुंटी से शुशीला केरकेट्टा एक सांसद है जो 2004 में कांग्रेस से झारखंड की महिला सांसद बनी थी। दूसरी महिला सांसदों सुमन महतो बनी थी, जो सांसद पति सुनिल महतो -झामुमो के स्वर्गवास के बाद 2007 में मध्यवर्ती चुनाव जीत कर संसद पहुंची थी। 2009 में हुए चुनाव में सूबे के 14 सीट में 15 महिलायें चुनावी मैदान में कुदी थी लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली। 15 में से 3 महिलायें भारतीय काम्यूनिष्ट पार्टी , चार निर्दलीय , रिवोलयूशनरी पार्टी से दो,और सोस्लीस्ट पार्टी , जेवीएम, झारखंड पार्टी, झारखंड जनाधार मंच, मानव मुक्ति मोरचा, एवं समता पार्टी से एक-एक प्रत्याशी चुनाव में खडे किये थे । देश की राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस एवं भाजपा द्वारा किसी भी महिला को टिकट नहीं दिया गया था। संभावता अप्रैल 2014 में होने वाले आम लोक सभा चुनाव में भी पार्टियों में महिला प्रत्याशी लाने की चर्चा नहीं है।
वर्तमान में किस पार्टी की कितनी महिल सांसद है
बीजेपी-14, कांग्रेस-24, तृणमूल कांग्रेस-03,बीएसपी-04,एसपी-04, जदयू-02, निर्दलीय-01, काम्यूनिष्ट पार्टी-01, अकाली दल-02, राष्ट्रीय लोक दल-01, शिव सेना-01, तेलंगाना राष्ट्रीय पार्टी-01,नेशनल पार्टी-02, द्रविड़ा म्यूनेत्रा-01
कुल- 61
सौरभ स्वीकृत
महिलाओं को अबला बनाये रखने की साजिश
Reviewed by saurabh swikrit
on
9:26 am
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